
CG News:- रतनपुर नगर पालिका में करीब डेढ़ साल तक जनसमस्याओं पर खामोश रहने के बाद कांग्रेस पार्षद दल अचानक सक्रिय हो गया है। कांग्रेस पार्षदों और विधायक प्रतिनिधि ने मुख्य नगर पालिका अधिकारी (सीएमओ) को ज्ञापन सौंपकर नगर की विभिन्न समस्याओं के समाधान की मांग की है। साथ ही साफ चेतावनी दी है कि यदि एक सप्ताह के भीतर कार्रवाई नहीं हुई तो आंदोलन किया जाएगा।
रतनपुर। नगर की राजनीति में इस घटनाक्रम के बाद चर्चाओं का बाजार गर्म है। वजह यह है कि बिजली, पानी, सड़क, नाली और सफाई जैसी समस्याएं कोई नई नहीं हैं। ये परेशानियां लंबे समय से नगरवासियों के सामने हैं। इस दौरान सत्ता पक्ष के पार्षद कई बार इन मुद्दों को उठाते रहे, कलेक्टर तक शिकायतें भी पहुंचीं, लेकिन विपक्ष की ओर से न तो कोई बड़ा प्रदर्शन हुआ और न ही कोई सार्वजनिक आंदोलन देखने को मिला।
डेढ़ साल बाद अचानक क्यों बढ़ी सक्रियता?
अब करीब डेढ़ साल बाद कांग्रेस पार्षद दल का एक साथ मैदान में उतरना कई सवाल भी खड़े कर रहा है। एक साथ कई आवेदन और ज्ञापन देकर नगर की समस्याओं को उठाने के बाद राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि आखिर विपक्ष की यह सक्रियता अचानक क्यों बढ़ी? क्या यह सिर्फ जनहित की चिंता है या इसके पीछे बदलते राजनीतिक समीकरण भी हैं? फिलहाल इस सवाल का जवाब हर कोई अपने-अपने तरीके से तलाश रहा है।
एक सप्ताह का अल्टीमेटम, फिर आंदोलन
कांग्रेस पार्षद दल ने सीएमओ को सौंपे ज्ञापन में नगर की मूलभूत सुविधाओं से जुड़ी समस्याओं के तत्काल निराकरण की मांग की है। साथ ही प्रशासन को एक सप्ताह का समय देते हुए चेतावनी दी है कि यदि तय समय में कार्रवाई नहीं हुई तो आंदोलन किया जाएगा।
इन नेताओं ने सौंपा ज्ञापन
ज्ञापन सौंपने वालों में कांग्रेस पार्षद पुष्पकांत कश्यप, सुनील अग्रवाल, शोभा दुबे, अर्चना सोनी, रामफल श्रीवास तथा विधायक प्रतिनिधि रियाज अहमद खोखर शामिल रहे।
विधायक प्रतिनिधि बोले- अब लगातार उठाएंगे नगर के मुद्दे
विधायक प्रतिनिधि रियाज अहमद खोखर ने कहा कि उनकी हाल ही में नियुक्ति हुई है और वे नगरहित से जुड़े मुद्दों को लगातार उठाते रहेंगे। वहीं नगर में यह चर्चा भी तेज है कि नगर पालिका के अंदरूनी हालात और प्रशासनिक खींचतान के बीच विपक्ष की यह नई सक्रियता आने वाले दिनों में स्थानीय राजनीति का नया मुद्दा बन सकती है।
रतनपुर की सियासत में फिलहाल सबसे ज्यादा चर्चा इसी बात की है कि जनसमस्याएं तो पहले भी थीं, लेकिन आवाज अब क्यों उठी? यही सवाल नगर की गलियों से लेकर राजनीतिक गलियारों तक गूंज रहा है।

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