
अपोलो अस्पताल बिलासपुर में स्वस्थ व्यक्तियों की मौत का क्रम जारी, लापरवाही के चलते अपोलो में इलाज के दौरान एक बुजुर्ग की फिर मौत,
गंभीर चिकित्सकीय लापरवाही बरतने परिजनों का आरोप,
सी एम एच ओ ने बनाई जांच समिति,
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बिलासपुर। छत्तीसगढ़ के बिलासपुर में स्थित अपोलो अस्पताल में इलाज में लापरवाही और स्वस्थ्य व्यक्तियों की मौत होने का सिलसिला जारी है।
इलाज के नाम पर लाखों रूपए ऐंठने के बाद भी इस अस्पताल में लापरवाही के चलते मरीजों की मौत हो रही है।
इस क्रम में गत दिवस अपोलो अस्पताल में इलाज के दौरान 81 वर्षीय बुजुर्ग की मौत के मामले ने तूल पकड़ लिया है। परिजनों द्वारा इलाज में लापरवाही के आरोप लगाए जाने के बाद स्वास्थ्य विभाग हरकत में आ गया है। मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी ने पूरे मामले की जांच के लिए पांच सदस्यीय समिति का गठन किया है। समिति को 10 दिनों के भीतर विस्तृत जांच रिपोर्ट और अपना अभिमत सौंपने के निर्देश दिए गए हैं। रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई तय होगी।
कोरबा जिले के ग्राम मलगांव निवासी राजेश कुमार जायसवाल की शिकायत पर स्वास्थ्य विभाग ने अपोलो अस्पताल में इलाज के दौरान हुई 81 वर्षीय उदय नारायण जायसवाल की मौत की जांच शुरू कर दी है। शिकायत के अनुसार उदय नारायण जायसवाल को 14 अप्रैल 2026 को दाहिने पैर में दर्द की शिकायत के बाद अपोलो अस्पताल में भर्ती कराया गया था। परिजनों का दावा है कि भर्ती के समय वे पूरी तरह होश में थे और स्वयं चलकर अस्पताल पहुंचे थे। लेकिन इलाज के दौरान 27 अप्रैल की सुबह अस्पताल प्रबंधन ने उनकी मौत की सूचना दे दी।
इलाज में लापरवाही का आरोप, निष्पक्ष जांच की मांग-
परिजनों का आरोप है कि उपचार के दौरान गंभीर चिकित्सकीय लापरवाही बरती गई। उनका कहना है कि इलाज के दौरान कई ऐसी परिस्थितियां सामने आईं, जिनकी निष्पक्ष जांच जरूरी है। शिकायतकर्ता ने मांग की है कि यदि जांच में चिकित्सकीय लापरवाही सिद्ध होती है तो संबंधित डॉक्टरों और अस्पताल प्रबंधन के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाए, ताकि भविष्य में किसी अन्य परिवार को ऐसी स्थिति का सामना न करना पड़े।
मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी ने बनाई 5 सदस्यीय जांच समिति-
मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी ने मामले की गंभीरता को देखते हुए पांच सदस्यीय जांच समिति गठित की है। समिति को निर्देश दिए गए हैं कि अस्पताल के सभी दस्तावेज, उपचार प्रक्रिया और संबंधित पक्षों के बयान के आधार पर विस्तृत जांच कर 10 दिनों के भीतर अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत करे।
जांच समिति ये शामिल हैं –
* डॉ. रक्षित जोगी – जांच अधिकारी (जिला परिवार कल्याण एवं स्वास्थ्य अधिकारी)
* डॉ. मनीष श्रीवास्तव – ईएनटी विशेषज्ञ
* डॉ. पंकज साहू – अस्थि रोग विशेषज्ञ
* डॉ. सौरभ शर्मा – नोडल अधिकारी
* सुमित्रा ध्रुव – प्रस्तुतकर्ता लिपिक
अब जांच रिपोर्ट पर टिकी सबकी नजर
परिजनों ने अस्पताल प्रबंधन पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं, वहीं स्वास्थ्य विभाग ने भी मामले को हल्के में लेने के बजाय जांच के आदेश दिए हैं। अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या जांच में चिकित्सकीय लापरवाही सामने आएगी? यदि आरोप सही पाए गए तो क्या जिम्मेदार डॉक्टरों और अस्पताल प्रबंधन पर कार्रवाई होगी, या यह मामला भी सिर्फ जांच रिपोर्ट तक ही सीमित रह जाएगा? स्वास्थ्य विभाग की 10 दिन में आने वाली रिपोर्ट पर अब सभी की निगाहें टिकी हैं।

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