CG News:- बदहाल सड़कों से परेशान कोटा के ग्रामीणों का फूटा गुस्सा, बोले- अब चाहिए ‘अपना विधायक’; हादसे रोकने और समस्याएं उठाने वाला हो जनप्रतिनिधि

CG News:- कोटा विकासखंड में जर्जर सड़कों और बदहाल बुनियादी सुविधाओं को लेकर ग्रामीणों की नाराजगी अब सियासी मांग में बदलती दिख रही है। केंदा-रतनपुर मार्ग, कोटा-पंडरा पथरा सड़क और बेलगहना क्षेत्र की सड़कों की हालत को लेकर ग्रामीण सवाल उठा रहे हैं। उनका कहना है कि शिकायतें और हादसे दोनों हो रहे हैं, लेकिन जिम्मेदार जनप्रतिनिधियों की चुप्पी नहीं टूट रही। अब ग्रामीणों की मांग है कि विधानसभा में ऐसा क्षेत्रीय विधायक हो, जो कोटा की समस्याओं पर मजबूती से आवाज उठाए और सरकार से जवाब मांगे।
सड़कें बदहाल, हादसे लगातार… फिर भी जिम्मेदार खामोश?
कोटा। विकासखंड की सड़कों की हालत ग्रामीणों के लिए परेशानी का सबब बनती जा रही है। कहीं सड़क जर्जर है तो कहीं गड्ढों ने राह मुश्किल कर दी है। केंदा–रतनपुर मार्ग, कोटा–पंडरा पथरा सड़क और बेलगहना क्षेत्र की कई सड़कों को लेकर ग्रामीण लंबे समय से सवाल उठाते रहे हैं।

ग्रामीणों का कहना है कि खराब सड़कों के कारण आए दिन दुर्घटनाएं हो रही हैं। लोगों को चोटें लग रही हैं, वाहन क्षतिग्रस्त हो रहे हैं, लेकिन समस्या जस की तस बनी हुई है।
शिकायतें हुईं, सीएम हेल्पलाइन तक पहुंचा मामला
ग्रामीणों का आरोप है कि सड़क और मूलभूत सुविधाओं से जुड़ी समस्याओं को लेकर कई बार शिकायतें की गईं। मामला सीएम हेल्पलाइन तक भी पहुंचा, लेकिन अपेक्षित समाधान नहीं हुआ।
लोगों का सवाल है कि जब शिकायतें दर्ज हो चुकी हैं, सड़क की हालत सामने है और हादसे भी हो रहे हैं, तो फिर जिम्मेदारों की सक्रियता जमीन पर दिखाई क्यों नहीं देती?
अब पार्टी नहीं, जनता की बात करने वाला नेता चाहिए
ग्रामीणों की नाराजगी सिर्फ सड़कों तक सीमित नहीं है। उनका कहना है कि क्षेत्र में छात्रावास, शिक्षा, स्वास्थ्य और अन्य बुनियादी सुविधाओं से जुड़े कई सवाल हैं, लेकिन राजनीतिक दलों के स्थानीय कार्यकर्ता भी खुलकर आवाज उठाने से बचते नजर आते हैं।
ग्रामीणों का कहना है कि पार्टी की राजनीति से ऊपर जनता की समस्या होनी चाहिए। यदि किसी इलाके की सड़क पर लोग परेशान हैं तो उस मुद्दे को उठाने के लिए किसी पार्टी की अनुमति की जरूरत नहीं होनी चाहिए।
‘चुनाव में नहीं, संकट में दिखे विधायक’
इसी नाराजगी के बीच अब कोटा क्षेत्र में क्षेत्रीय विधायक की मांग जोर पकड़ती नजर आ रही है।
ग्रामीणों का कहना है कि उन्हें ऐसा जनप्रतिनिधि चाहिए जो केवल चुनाव के समय गांवों में दिखाई न दे, बल्कि सड़क खराब होने पर सड़क पर, अस्पताल की समस्या पर अस्पताल में और ग्रामीणों की परेशानी के वक्त उनके बीच खड़ा दिखाई दे।
उनकी मांग है कि विधानसभा में ऐसा प्रतिनिधि पहुंचे जो क्षेत्र की समस्याओं को मजबूती से उठाए और जरूरत पड़ने पर सरकार से सीधे सवाल करे।
सवाल विधायक और सांसद दोनों से

ग्रामीणों की नाराजगी अब स्थानीय जनप्रतिनिधियों तक पहुंच रही है। सवाल यह भी उठ रहा है कि जब कोटा की जनता सड़क, शिक्षा, स्वास्थ्य और दूसरी बुनियादी सुविधाओं के लिए परेशान है तो उनकी आवाज विधानसभा और संसद तक कौन पहुंचाएगा?
क्या सिर्फ शिकायत दर्ज होना काफी है या उसके समाधान की जिम्मेदारी भी तय होगी?
क्या बदल रही है कोटा की सियासत?
क्षेत्रीय विधायक की उठ रही मांग को सिर्फ सड़क की समस्या से जोड़कर नहीं देखा जा रहा। ग्रामीणों की नाराजगी अब प्रतिनिधित्व और जवाबदेही के सवाल तक पहुंच गई है।
आने वाले समय में यह मांग कोटा की स्थानीय राजनीति को कितना प्रभावित करती है, यह देखना दिलचस्प होगा। फिलहाल इतना जरूर है कि बदहाल सड़कें अब सिर्फ गड्ढों की कहानी नहीं रह गईं—वे ग्रामीणों के गुस्से और राजनीतिक बदलाव की मांग का रास्ता भी बनती दिख रही हैं।

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