CG News:सियाराम गैस एजेंसी की मनमानी,नगर पालिका अध्यक्ष ने खाद्य अधिकारी को लिखा पत्र,कालाबाजारी रोकने,कार्रवाई की मांग।


गौरेला-पेंड्रा-मरवाही जिले में आम जनता से जुड़ी एक बड़ी समस्या सामने आई है। गौरेला की सियाराम गैस एजेंसी पर गैस की कालाबाजारी और मनमानी के गंभीर आरोप लगे हैं। इसको लेकर अब जनप्रतिनिधि ने मोर्चा खोल दिया है। नगर पालिका परिषद गौरेला के अध्यक्ष मुकेश दुबे ने जिला खाद्य अधिकारी को पत्र लिखकर एजेंसी के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की है।
क्या है आरोप-
नगर पालिका अध्यक्ष मुकेश दुबे ने अपने पत्र में दिनांक 22/8/2026 को जिला खाद्य अधिकारी गौरेला-पेंड्रा-मरवाही को संबोधित करते हुए लिखा है कि आम नागरिकों द्वारा लगातार सियाराम गैस एजेंसी गौरेला के संबंध में शिकायतें प्राप्त हो रही हैं।
शिकायतों के अनुसार एजेंसी द्वारा कंपनी द्वारा निर्धारित मूल्य से अधिक दर पर गैस सिलेंडर की बिक्री की जा रही है। साथ ही कंपनी के नियमों का खुला उल्लंघन करते हुए गैस सिलेंडर की आपूर्ति घर तक न पहुंचाकर गोदाम से ही की जा रही है, जिससे आम उपभोक्ताओं को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।

500 सौ रुपये एक्स्ट्रा वसूली का आरोप-
पत्र में और भी चौंकाने वाले आरोप लगाए गए हैं। बताया गया है कि जिन उपभोक्ताओं का नंबर आ जाता है, उन्हें भी 3 से 4 दिन बाद गैस सिलेंडर दिया जाता है। जबकि बिना नंबर वाले लोगों से 500 रुपये तक अतिरिक्त शुल्क लेकर तुरंत गैस सिलेंडर दे दिया जाता है। यह खुलेआम कालाबाजारी है।
इसके अलावा मोबाइल में डी.ए.सी. नंबर आने के बाद एजेंसी के द्वारा खुद कॉल करके हितग्राहियों से डी.ए.सी. नंबर मांगा जाता है और यह प्रलोभन दिया जाता है कि 2 से 3 दिन में सिलेंडर आपके घर पहुंच जाएगा, परंतु 10 से 15 दिनों बाद भी सिलेंडर प्राप्त नहीं होता। जब उपभोक्ता कॉल करते हैं तो व्यर्थ का बहाना बनाकर फोन काट दिया जाता है।
धरने की चेतावनी
नगर पालिका अध्यक्ष ने पत्र में लिखा है कि सुशासन तिहार के दौरान भी इस संबंध में शिकायत प्राप्त हुई थी, परंतु कोई कार्यवाही न होने से इनके हौसले बुलंद हैं और आम जनता लगातार परेशान हो रही है। अतः उन्होंने मांग की है कि शिकायत को संज्ञान में लेकर कालाबाजारी खाद्य अधिनियम के तहत कार्रवाई कर आम जनता को इस परेशानी से निजात दिलाई जाए। तथा गैस एजेंसी के द्वारा आम जनता की जेब में जो डाका डाला जा रहा है उसे बंद कराया जाए।
अंत में उन्होंने चेतावनी देते हुए लिखा है कि यदि आवश्यक कार्यवाही नहीं की गई तो जनहित के लिए वे धरना प्रदर्शन के लिए बाध्य होंगे, जिसकी समस्त जवाबदारी जिला खाद्य विभाग की होगी। अब देखने वाली बात यह होगा कि खाद्य विभाग और प्रशासन इस पर किस तरह की कार्यवाही करती है।



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