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जनता के संघर्ष की बड़ी जीत: पामगढ़ के डोगाकोहरौद को मिली ₹6.05 करोड़ की पक्की सड़क

आमरण अनशन और विधायक शेषराज हरबंश के तीखे तेवरों के आगे झुका शासन, प्रशासनिक मंजूरी जारी

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जांजगीर-चांपा। लोकतंत्र में जनता की सामूहिक ताकत और जायज मांगों के आगे आखिरकार सत्ता को झुकना ही पड़ता है। पामगढ़ विधानसभा क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले ग्राम डोंगरकोहरौद के ग्रामीणों का लंबा और कड़ा संघर्ष ऐतिहासिक जीत में तब्दील हो चुका है। जलभराव, दलदल और जानलेवा गड्ढों से जूझ रही जनता के आमरण अनशन और स्थानीय कांग्रेस विधायक शेषराज हरबंश की सदन से सड़क तक की पुरजोर पैरवी के बाद, छत्तीसगढ़ शासन के लोक निर्माण विभाग ने पामगढ़ से लाहौद मार्ग से डोंगरकोहरौद बस्ती तक 4.337 किलोमीटर लंबी सड़क निर्माण के लिए ₹605.09 लाख (6 करोड़ 5 लाख 9 हजार रुपये) की भारी-भरकम राशि की प्रशासनिक स्वीकृति प्रदान कर दी है। मंत्रालय महानदी भवन से इसके आधिकारिक आदेश जारी कर दिए गए हैं।
जब जनता उतरी सड़क पर: आमरण अनशन से हिला प्रशासनिक अमला

डोंगरकोहरौद बस्ती के निवासी पिछले लंबे समय से कीचड़ और बदहाल रास्तों के कारण नारकीय जीवन जीने को मजबूर थे। बच्चों को स्कूल जाने और मरीजों को अस्पताल ले जाने में रोजाना बड़ी दुर्घटनाओं का अंदेशा बना रहता था। जब प्रशासन ने सुध नहीं ली, तो क्षेत्र की महिलाओं, बुजुर्गों और युवाओं ने ऐतिहासिक आमरण अनशन का रास्ता चुना।


जनता के इस बड़े आंदोलन को पामगढ़ विधानसभा की सक्रिय कांग्रेस विधायक शेषराज हरबंश ने न केवल अपना पूर्ण समर्थन दिया, बल्कि कांग्रेस साथियों के साथ अनशन स्थल पर बैठकर सरकार को सड़क निर्माण के लिए मजबूर किया। विधायक ने इस ऐतिहासिक जीत पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए कहा, “यह जीत क्षेत्र की उस देवतुल्य जनता की जीत है जिसने अपने हक के लिए विपरीत परिस्थितियों में अनशन किया। जनता के हित के हर कार्य के लिए मैं हमेशा उनके साथ खड़ी हूँ।”
शासकीय आदेश की मुख्य बातें: कड़ी शर्तों के साथ मिली मंजूरी
मंत्रालय द्वारा जारी आधिकारिक आदेश पत्र के अनुसार, वित्त विभाग की सहमति के बाद लोक निर्माण विभाग ने इस कार्य को मंजूरी दी है। इस बार निर्माण की गुणवत्ता और पारदर्शिता को लेकर बेहद कड़े नियम तय किए गए हैं।

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कुल बजट व लंबाई:

₹6,05,09,000 की कुल राशि से 4.337 किलोमीटर लंबी चमचमाती सड़क बनेगी।
90% बाधा रहित भूमि अनिवार्य: सक्षम अधिकारी से तकनीकी स्वीकृति मिलने और कम से कम 90 प्रतिशत बाधा रहित भूमि उपलब्ध होने पर ही निविदा आमंत्रित की जाएगी।
समय-सीमा और अर्थदंड: कार्य को अनुबंध के अनुसार तय समय पर पूरा करना होगा। अनावश्यक समय वृद्धि नहीं दी जाएगी और देरी होने पर ठेकेदार/संबंधितों पर भारी अर्थदंड लगाया जाएगा।

क्वालिटी कंट्रोल पर विशेष नजर: प्रमुख अभियंता को निर्देशित किया गया है कि कार्य की गुणवत्ता में किसी भी प्रकार की कमी पाए जाने पर जिम्मेदारी तय कर सख्त दंडात्मक कार्रवाई की जाए।
अनुसूचित जाति बाहुल्य क्षेत्र के विकास को मिलेगी नई रफ्तार
शासन द्वारा जारी बजट प्रावधानों के अनुसार, यह पूरा व्यय मांग संख्या/शीर्ष 64/5054 के तहत “अनुसूचित जाति बाहुल्य क्षेत्रों में सड़कों का निर्माण कार्य” योजना के अंतर्गत विकलनीय होगा। इस सड़क के बनने से न सिर्फ डोंगरकोहरौद बस्ती के हजारों लोगों का मुख्य मार्ग से सीधा और सुगम संपर्क स्थापित होगा, बल्कि क्षेत्र के सामाजिक और आर्थिक विकास को भी एक नई दिशा मिलेगी।

प्रशासनिक स्तर पर निविदा प्रक्रिया जल्द ही शुरू होने वाली है, जिससे ग्रामीणों में उत्साह का माहौल है और उन्होंने अपनी विधायक शेषराज हरबंश एवं आंदोलनकारियों का आभार व्यक्त किया है।

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YASHVANT PANDEY

समाचार रिपोर्टर के रूप में उनका उद्देश्य समाज की समस्याओं और जनहित के मुद्दों को प्रमुखता से उठाकर प्रशासन तक पहुँचाना है।

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