CG News:- वारंट के नाम पर राजधानी से युवक को उठाया, फिर पुलिस की ‘नो एंट्री’! कोर्ट में पेशी नहीं, परिजनों को भी जानकारी नहीं; आखिर कहां है मनीष? देखें VIDEO

CG News:- सुबह पुलिस रायपुर से युवक को उठाकर ले गई, शाम तक कोर्ट में पेश नहीं किया और परिजन थाने से साइबर सेल तक भटकते रहे। पुलिस कहती है वारंट है, लेकिन युवक कहां है और किस हिरासत में है—इसका साफ जवाब परिवार को नहीं मिल रहा। सवाल सीधा है—वारंट था तो कोर्ट में पेशी क्यों नहीं? पुलिस के पास है तो परिजनों को जानकारी क्यों नहीं? और अगर सब कुछ कानून के मुताबिक है, तो फिर मनीष को लेकर इतनी गोपनीयता क्यों? अब सवाल सिर्फ एक परिवार का नहीं, पुलिस की कार्रवाई और कानूनी प्रक्रिया का है।
Mahasamund महासमुंद। यूं तो पुलिस पर लगातार मानवाधिकारों और अदालती आदेशों के उल्लंघन के आरोप लगते रहे हैं पर ताजा मामला महासमुंद पुलिस का सामने आया है। महासमुंद पुलिस ने बसना थाना में आए एक अदालती वारंट का हवाला दे रायपुर निवासी युवक को आज सुबह रायपुर से उठाया पर अदालत का समय समाप्त होने के बावजूद भी उसे अदालत में प्रस्तुत नहीं किया। युवक के परिजनों को महासमुंद पुलिस युवक को हिरासत में लेने से ही मना कर रही है। जिससे युवक के परिजन युवक की सुरक्षा और अपहरण की आशंका को लेकर चिंतित है।
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पूरा मामला महासमुंद जिले के बसना थाना से जुड़ा हुआ है। सरसींवा का रहने वाला युवक मनीष अग्रवाल (32) अब रायपुर शिफ्ट हो चुका है। वह रायपुर के शंकर नगर एरिया में परिजनों के साथ रहता है। परिजनों का आरोप है कि आज सुबह 7:30 बजे महासमुंद पुलिस उनके निवास पर पहुंची। टीआई शरद दुबे के नेतृत्व में पहुंची पुलिस टीम ने मनीष अग्रवाल को घर से उठाया। परिजनों द्वारा वजह पूछने पर पुलिस ने बताया कि महासमुंद के बसना थाने में मनीष अग्रवाल के नाम से एक अदालती वारंट आया है। वारंट का कारण पूछने पर पुलिसकर्मियों और थाना प्रभारी ने बताया कि एक चेक बाउंस के मामले में 138 का प्रकरण अदालत में मनीष अग्रवाल के खिलाफ चल रहा है। जिसमें मनीष अग्रवाल के खिलाफ अदालत से गिरफ्तारी वारंट जारी हुआ है। इसलिए मनीष को गिरफ्तार किया जा रहा है।
परिजनों के द्वारा पूछने पर पुलिसकर्मियों के द्वारा बताया गया कि चूंकि बसना थाने में वारंट आया है इसलिए मनीष को पहले बसना थाना ले जाया जाएगा,उसके बाद अदालत के समक्ष प्रस्तुत कर अदालत के निर्देशों पर आगे कार्यवाही की जाएगी। मनीष की जानकारी लेने जब परिजन बसना थाने पहुंचे तो वहां उन्हें मनीष नहीं मिला और ना ही शाम अदालत बंद होने तक पुलिस ने मनीष को अदालत के समक्ष ही पेश किया था। थाने में मौजूद पुलिसकर्मियों ने किसी मनीष अग्रवाल नामक व्यक्ति को थाना लाने से ही स्पष्ट इनकार कर दिया। काफी पूछताछ करने पर एक पुलिसकर्मी ने बताया कि मनीष को साइबर सेल में रखा गया है। वहां जाकर पूछताछ करने पर मनीष को किस मामले में हिरासत में लिया गया है और बसना की जगह यहां क्यों रखा गया है ,कुछ भी बताने से इंकार कर दिया गया।
संवैधानिक अधिकारों का उल्लंघन:–
आरोपियों की गिरफ्तारी की दशा में सुप्रीम कोर्ट के स्पष्ट नियम है कि गिरफ्तारी की सूचना तत्काल आरोपी के परिजनों को लिखित तौर पर देना है। पर मनीष अग्रवाल की गिरफ्तारी के बाद महासमुंद पुलिस कोई सूचना नहीं दे रही है और ना ही साइबर सेल में मिलने दे रही है। गिरफ्तारी के 24 घंटे के भीतर अदालत में प्रस्तुत करने का नियम है पर बावजूद इसके सुबह 7:30 बजे उठाने के बाद भी शाम 7:00 बजे अदालत बंद होने तक मनीष अग्रवाल को अदालत में पेश नहीं किया गया। इससे मनीष अग्रवाल के संवैधानिक के साथ ही कानूनी अधिकारों का भी उल्लंघन हो रहा है। परिजनों ने आशंका व्यक्त की है कि पुलिस मनीष को किसी झूठे मामले में फंसा सकती है।
अब जवाब पुलिस को देना है!
फिलहाल इस पूरे मामले में सवाल सिर्फ मनीष अग्रवाल का नहीं, बल्कि उस प्रक्रिया का है जिसके तहत पुलिस किसी व्यक्ति को वारंट के नाम पर उसके घर से लेकर जाती है। अगर वारंट था तो अदालत में पेशी क्यों नहीं हुई? अगर मनीष पुलिस की हिरासत में है तो परिवार को उसकी स्पष्ट जानकारी क्यों नहीं दी जा रही? और बसना थाने से लेकर साइबर सेल तक आखिर यह कार्रवाई किस प्रक्रिया के तहत चल रही है? एक परिवार अपने सदस्य को लेकर जवाब मांग रहा है और अब निगाहें महासमुंद पुलिस के जवाब पर हैं। क्योंकि सवाल जितने सीधे हैं, उनके जवाब भी उतने ही साफ होने चाहिए।
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