छात्र जीवन से मंत्री पद तक, स्व.डॉ. भंवर सिंह पोर्ते की संघर्ष गाथा,83वीं जयंती पर किया याद।

गौरेला-पेंड्रा-मरवाही: जिले के सबसे कद्दावर आदिवासी नेता, पूर्व सांसद, पूर्व मंत्री और गोंडवाना आंदोलन के प्रणेता डॉ. भंवर सिंह पोर्ते की आज 83वीं जयंती पूरे गौरेला-पेंड्रा-मरवाही जिले में श्रद्धा और सम्मान के साथ उनके प्रतिमा में माल्यार्पण कर श्रद्धांजलि अर्पित किया। उनका जन्म 1943 में मरवाही ब्लॉक के छोटे से गांव बदरौड़ी में हुआ था और आज उसी मिट्टी के लाल को उनके ही क्षेत्र में हजारों लोगों ने याद किया।
आज सुबह से ही मरवाही स्थित उनके प्रतिमा स्थल, Dr. Bhanwar Singh Porte Memorial Tribal Education And Research Institute और डॉ. भंवर सिंह पोर्ते शासकीय कॉलेज मरवाही में कार्यक्रमों का दौर शुरू हो गया। सबसे पहले उनकी पुत्री अर्चना पोर्ते,शंकर कंवर सहित परिवार के सदस्यों व उनके चहेते समर्थकों, आदिवासी नेता मूलचंद कुशराम सहित सैकड़ों लोगों ने उनके चित्र और प्रतिमा पर माल्यार्पण कर भावभीनी श्रद्धांजलि दी।

बदरौड़ी के लाल से मरवाही के मसीहा तक का सफर –
डॉ. पोर्ते सिर्फ एक नेता नहीं, बल्कि एक विचारधारा थे। विद्यार्थी जीवन में ही 1969-71 के दौरान उन्होंने प्रदेश के आदिवासियों के उत्थान एवं कल्याण हेतु कार्य करना शुरू कर दिया था। वे आदिवासी नवयुवक संगठन के अध्यक्ष बने और आदिवासियों एवं वंचितों के शोषण एवं अन्याय के खिलाफ लगातार आवाज उठाते रहे।
राजनीतिक जीवन का स्वर्णिम इतिहास –
1972 में पहली बार विधानसभा सदस्य मरवाही क्षेत्र से निर्वाचित हुए। 1973 में उप मंत्री शिक्षा के पद पर आसीन हुए। 1977 में दूसरी बार मरवाही से जीते। 1978 में जब कांग्रेस का विभाजन हुआ तो उन्होंने कांग्रेस के 10 विधायकों को दल में बनाए रखने में ऐतिहासिक योगदान दिया और इंदिरा कांग्रेस में बने रहे। इंदिरा गांधी की गिरफ्तारी के विरोध में उन्होंने मुख्य सचिव का घेराव किया और 15 दिन की जेल यात्रा भी की। 1978 से 1989 तक वे मध्य प्रदेश युवक कांग्रेस के अध्यक्ष रहे।
1980 में उन्होंने मध्य प्रदेश आदिवासी विकास परिषद की स्थापना की और आजीवन अध्यक्ष रहे। 1980 में तीसरी बार मरवाही से जीतकर आदिम जाति कल्याण एवं विद्युत मंत्री, 1981 में जनशक्ति मंत्री, 1982 में पंचायत मंत्री, 1984 में लघु सिंचाई मंत्री और 1985 में उच्च शिक्षा मंत्री बने। 1986 में वे 20 सूत्री कार्यक्रम, हिंदुस्तान कॉर्पोरेशन के डायरेक्टर और राष्ट्रीय एकता परिषद के सदस्य रहे।

उनकी सबसे बड़ी देन 2-3 मई 1987 को भोपाल में आदिवासी परिषद के आठवें सम्मेलन में पेश किया गया भोपाल दस्तावेज है, जिसके आधार पर मध्यप्रदेश शासन की आदिवासी कल्याण की अधिकांश योजनाएं आज भी संचालित हो रही हैं। 1990-92 में वे चौथी बार मरवाही से निर्वाचित हुए और सुंदरलाल पटवा मंत्रिमंडल में मंत्री बने। अपने कुशल नेतृत्व के कारण वे आजीवन चुनाव जीतते रहे। 16 नवंबर 1993 को उनका असामयिक निधन हो गया।
कॉलेज में छात्रों ने किया याद –
आज उनकी 83वीं जयंती पर डॉ. भंवर सिंह पोर्ते कॉलेज मरवाही में सबसे भावुक दृश्य देखने को मिला। उनके नाम पर बने इस चहेते कॉलेज के छात्र-छात्राओं ने उन्हें याद कर श्रद्धांजलि दी। छात्रों ने कहा कि बदरौड़ी गांव से निकलकर मंत्री पद तक पहुंचने वाले डॉ. पोर्ते आज भी उनके लिए प्रेरणा हैं। मरवाही विधानसभा क्षेत्र के समाज सुधार में उनका बहुत बड़ा योगदान है, जिसमें वे हमेशा दलित, शोषित, पीड़ित की आवाज उठाते रहे। इसीलिए मरवाही क्षेत्र में आज भी उन्हें आदिवासियों का मसीहा कहा जाता है।
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