CG News:- दो राजमिस्त्रियों की मौत के बाद चला निगम का बुलडोजर! जिस मकान की पहले से शिकायत थी, उस पर कार्रवाई के लिए दो जिंदगियां क्यों गईं?

CG News:-बिलासपुर के स्वर्ण जयंती नगर में दो दिन पहले करंट की चपेट में आकर दो राजमिस्त्रियों की मौत हो गई। अब उसी निर्माणाधीन मकान पर नगर निगम का बुलडोजर चला है। हैरानी की बात ये है कि इस निर्माण को लेकर निगम में पहले से शिकायतें की जा रही थीं। निगम के पास नोटिस देने तक की कार्रवाई का रिकॉर्ड था, लेकिन निर्माण चलता रहा। दो लोगों की मौत के बाद शुक्रवार को निगम का अमला पहुंचा और अवैध हिस्से को जेसीबी से ढहा दिया। अब सवाल यही है—जब शिकायत पहले से थी, नोटिस पहले से थे, तो कार्रवाई के लिए दो लोगों की मौत का इंतजार क्यों किया गया?
बिलासपुर। स्वर्ण जयंती कॉलोनी में जिस मकान के निर्माण के दौरान दो राजमिस्त्रियों की जान गई, अब उसी मकान के अवैध हिस्से पर नगर निगम ने कार्रवाई की है। निगम के मुताबिक भवन का निर्माण अनूप सिंह ठाकुर, पिता स्व. कार्तिक सिंह ठाकुर द्वारा कराया जा रहा था।
जांच में निगम ने पाया कि मौके पर निर्माण स्वीकृत भवन अनुज्ञा और नक्शे के मुताबिक नहीं हो रहा था। इस भवन के लिए 09 दिसंबर 2025 को भवन अनुज्ञा स्वीकृत की गई थी, लेकिन बाद में मौके पर स्वीकृत नक्शे से अलग अतिरिक्त निर्माण किए जाने की बात सामने आई।
यहीं से सवाल शुरू होते हैं।
जब निगम के रिकॉर्ड में भवन की अनुमति थी और मौके पर निर्माण उससे अलग मिला, तो क्या इसकी निगरानी की जिम्मेदारी किसी की नहीं थी? और अगर निगम को निर्माण में गड़बड़ी नजर आ गई थी, तो उसे समय रहते रोकने की कोशिश कितनी गंभीरता से हुई?
नोटिस पर नोटिस… लेकिन निर्माण नहीं रुका
नगर निगम का कहना है कि भवन स्वामी को नियमानुसार नोटिस दिया गया था। अवैध निर्माण को लेकर जवाब मांगा गया और नियमों के अनुसार निर्माण करने के निर्देश भी दिए गए।
इसके बाद 09 अप्रैल 2026 और 26 मई 2026 को भी नोटिस की तामिली कराई गई। निगम के मुताबिक इसके बावजूद संतोषजनक जवाब नहीं मिला और निर्माण कार्य भी जारी रहा।
अब जरा तस्वीर समझिए—
नोटिस जारी हो रहे थे…
निर्माण जारी था…
और फिर हादसा हुआ।
दो राजमिस्त्रियों की मौत हो गई। इसके बाद शुक्रवार को निगम का बुलडोजर पहुंच गया।
दो मौतों के बाद टूटा अवैध निर्माण
निगम की टीम ने मौके पर पहुंचकर स्वीकृत नक्शे के विपरीत किए गए निर्माण को जेसीबी मशीन की मदद से ध्वस्त कर दिया।
कार्रवाई के दौरान निगम की भवन शाखा, अतिक्रमण शाखा और पुलिस बल के अधिकारी–कर्मचारी भी मौजूद रहे।
कार्रवाई अब हो गई है, लेकिन उन दो परिवारों के सवाल का जवाब कौन देगा, जिन्होंने अपने लोगों को खो दिया?
क्या समय रहते निर्माण रुकवाया जाता तो हादसा टल सकता था?
अगर निगम को निर्माण के अवैध होने की जानकारी थी, तो बुलडोजर पहले क्यों नहीं पहुंचा?
और अगर नोटिस के बावजूद निर्माण जारी था, तो जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही तय होगी या मामला सिर्फ अवैध हिस्सा तोड़ने तक ही सीमित रहेगा?
बुलडोजर चल गया है, मलबा भी हट जाएगा… लेकिन दो राजमिस्त्रियों की मौत के बाद उठे ये सवाल शायद इतनी आसानी से नहीं हटेंगे।

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