धूल से बेहाल गांव, हाईवे पर उतरे ग्रामीणरतनपुर–केंदा सड़क निर्माण बना मुसीबत, चक्का जाम से थमी रफ्तार

Bilaspur News बिलासपुर। विकास की एक तस्वीर होती है—चमचमाती सड़कें, आसान सफर, बेहतर जीवन। लेकिन रतनपुर–केंदा नेशनल हाईवे पर एक दूसरी तस्वीर भी है—धूल, परेशानी और विरोध। बेलगहना चौकी क्षेत्र के ग्राम पंचायत पंडरा पथरा में यही दूसरी तस्वीर अब सड़क पर उतर आई है। नव निर्माणाधीन सड़क से उड़ रही धूल ने गांव के लोगों का जीना मुश्किल कर दिया है। गुरुवार को ग्रामीणों ने नेशनल हाईवे पर चक्का जाम कर दिया। कुछ देर के लिए गाड़ियां रुकीं, लंबी कतारें लगीं, और विकास की रफ्तार थम गई। सवाल है—क्या यह वही सड़क है, जिसका इंतजार लोगों को था?
बिलासपुर। रतनपुर–केंदा मार्ग पर बन रही नव निर्माणाधीन नेशनल हाईवे परियोजना ने ग्राम पंचायत पंडरा पथरा के ग्रामीणों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। बेलगहना चौकी क्षेत्र में लगातार उड़ रही धूल से परेशान ग्रामीणों का आक्रोश गुरुवार को उस वक्त फूट पड़ा, जब उन्होंने नेशनल हाईवे पर चक्का जाम कर विरोध दर्ज कराया। इस दौरान कुछ समय के लिए यातायात पूरी तरह बाधित रहा और सड़क के दोनों ओर वाहनों की लंबी कतारें लग गईं।
ग्रामीणों के मुताबिक रतनपुर से केंदा तक चल रहे सड़क निर्माण कार्य में धूल नियंत्रण के लिए कोई ठोस इंतजाम नहीं किए गए हैं। न तो नियमित रूप से पानी का छिड़काव हो रहा है और न ही निर्माण एजेंसी द्वारा सुरक्षा के अन्य उपाय अपनाए जा रहे हैं। भारी वाहनों की लगातार आवाजाही से दिनभर धूल का गुबार उड़ता रहता है, जिससे गांव के घर, दुकानें और स्कूल तक प्रभावित हो रहे हैं।
धूल के बढ़ते असर ने ग्रामीणों की दिनचर्या को बुरी तरह प्रभावित कर दिया है। स्थानीय लोगों का कहना है कि बच्चों, बुजुर्गों और बीमार व्यक्तियों को सांस संबंधी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। स्थिति यह है कि गांव में रहना दूभर होता जा रहा है। ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि कई बार संबंधित विभाग और ठेकेदार को समस्या से अवगत कराया गया, लेकिन हर बार केवल आश्वासन मिला, जमीनी स्तर पर कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं हुई।
लगातार अनदेखी से नाराज ग्रामीणों ने अंततः सड़क पर उतरकर विरोध प्रदर्शन किया और हाईवे जाम कर दिया। सूचना मिलते ही बेलगहना चौकी प्रभारी हेमंत सिंह ठाकुर मौके पर पहुंचे। उन्होंने ग्रामीणों से चर्चा कर उनकी समस्याएं सुनीं और आवश्यक कार्रवाई का आश्वासन दिया। काफी देर तक चली बातचीत के बाद ग्रामीणों ने जाम समाप्त किया, जिसके बाद यातायात फिर से सुचारु हो सका।
हालांकि, ग्रामीणों ने प्रशासन, निर्माण एजेंसी और ठेकेदार को स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही नियमित पानी छिड़काव, धूल नियंत्रण और सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम नहीं किए गए, तो आने वाले दिनों में आंदोलन को और उग्र किया जाएगा। ऐसी स्थिति में उत्पन्न होने वाली किसी भी अव्यवस्था की जिम्मेदारी संबंधित विभाग और निर्माण एजेंसी की होगी।

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