Bilaspur News:- NTPC राखड़ घोटाला (पार्ट 01): कागजों में 120 किमी, जमीन पर सिर्फ 15–20 किमी स्थानीय लोगों ने ट्रकों को कई बार पकड़ा, लेकिन सिस्टम मौन – जांच कहाँ है?

Bilaspur News :- बिलासपुर।सीपत एनटीपीसी में राखड़ (फ्लाई ऐश) के परिवहन को लेकर आरोप हैं कि कागजों में इसे 120–130 किमी दूर डंपिंग दिखाया जाता है, लेकिन हकीकत में यह महज 15–20 किमी में ही गिरा दिया जाता है। ट्रांसपोर्टर और अधिकारियों की कथित मिलीभगत ने करोड़ों का खेल आसान बना दिया। स्थानीय लोगों ने कई ट्रकों को पकड़ लिया, लेकिन सिस्टम अब भी “देखो, हमें क्या!” की मुद्रा में खड़ा है। आखिर कब तक चलेंगे ऐसे कागजी खेल, और कब आएगा सच की सच्चाई सामने?

Bilaspur बिलासपुर। सीपत एनटीपीसी का राखड़ डेम… और यहां से शुरू होता है एक ऐसा खेल, जिसमें ट्रक कम चलते हैं, कागज ज्यादा दौड़ते हैं। आरोप है कि राखड़ (फ्लाई ऐश) को 120–130 किलोमीटर दूर डंपिंग दिखाकर हकीकत में महज 15–20 किलोमीटर में ही गिरा दिया जाता है—और बाकी दूरी कागजों और सिस्टम में पूरी कर ली जाती है।
शिकायतकर्ता ने इस पूरे खेल को लेकर बिलासपुर के एक थाने में करीब कुछ महीने पहले लिखित शिकायत दी थी। आरोप सीधे–सीधे एनटीपीसी, एनएचएआई और टोल प्लाजा से जुड़े अधिकारियों पर है। लेकिन सवाल यह है कि इतने बड़े आरोपों के बावजूद जांच आज तक पूरी क्यों नहीं हुई? क्या फाइलों ने भी दूरी तय करना बंद कर दिया है?
फर्जीवाड़े का फॉर्मूला समझिए—
राखड़ को उरगा–पत्थलगांव (करीब 120–130 किमी) भेजना कागजों में दिखाया जाता है। लेकिन ट्रक वहां तक पहुंचते ही नहीं। जयरामनगर, खैरा, बिल्हा, अकलतरा की खदानों में ही डंपिंग हो जाती है।
यानी असली सफर छोटा… लेकिन बिल लंबा।
आरोप यह भी है कि जीपीएस को ट्रकों में नहीं, बल्कि अलग कार में घुमाकर दूरी पूरी दिखा दी जाती है। टोल प्लाजा की रसीदें… कैमरों की निगरानी… सब कागजों में फिट कर दिया जाता है। और फिर शुरू होता है—करोड़ों का खेल।
ठेका और नेटवर्क
इस पूरे ट्रांसपोर्ट का जिम्मा आर्शीवाद ट्रांसपोर्ट को दिया गया है, जिसके प्रोपाइटर मोनू राजपाल बताए जा रहे हैं। आरोप है कि ट्रांसपोर्टर और एनटीपीसी अधिकारियों की मिलीभगत से यह खेल वर्षों से चल रहा है—और सिस्टम चुप है।
जब जनता ने पकड़ा सच
स्थानीय लोगों ने कई बार मौके पर ट्रकों को रोका। एक बार तो 8 ट्रेलर पकड़ लिए गए—CG 10 BJ 9686, CG 10 BJ 9979, CG 10 BS 9455, CG 10 BJ 9389, CG 10 BJ 9474, CG 10 BJ 9383, CG 10 BS 9105—और एक बिना नंबर प्लेट का वाहन।
चौंकाने वाली बात—इनके पास डंपिंग का कोई वैध एनओसी तक नहीं था।
सबसे बड़ा सवाल
अगर सब कुछ सामने है, तो कार्रवाई क्यों नहीं?
क्या जांच जानबूझकर धीमी है?
क्या विभागीय मिलीभगत इस खेल को बचा रही है?
बड़े घोटाले की चेतावनी
विशेषज्ञ कहते हैं कि यह केवल कुछ ट्रकों और डंपिंग तक सीमित नहीं। अगर गहन जांच न हुई, तो करोड़ों का बड़ा घोटाला सामने आ सकता है।
क्योंकि यहां ट्रक नहीं दौड़ रहे…
यहां सिस्टम दौड़ रहा है—और सच कहीं बीच रास्ते में गिरा दिया गया है।

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